छत्तीसगढ़ विधानसभा में साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिरा, CM बोले- अगली बार 70+ सीटें, भूपेश का हमला- अदृश्य शक्ति चला रही सरकार
By : hashtagu, Last Updated : July 18, 2026 | 11:04 am
रायपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें और अंतिम दिन साय सरकार के खिलाफ कांग्रेस की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) करीब 14 घंटे 30 मिनट चली लंबी चर्चा के बाद ध्वनिमत (Voice Vote) से गिर गया। चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह प्रस्ताव उनकी सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि तीन करोड़ छत्तीसगढ़वासियों के जनादेश (Mandate) के खिलाफ लाया गया है। उन्होंने दावा किया कि अगला विधानसभा चुनाव भी भारतीय जनता पार्टी जीतेगी और इस बार 70 से अधिक सीटें हासिल करेगी, जबकि कांग्रेस अगले 25 वर्षों तक सत्ता में वापसी नहीं कर पाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि एक आदिवासी किसान का बेटा मुख्यमंत्री बना है और यही बात कांग्रेस को स्वीकार नहीं हो रही है। उन्होंने कांग्रेस की पिछली सरकार पर भ्रष्टाचार, घोटालों, वादाखिलाफी और दिल्ली का ‘एटीएम’ बनने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनहित के लिए लगातार काम कर रही है और जनता का विश्वास भाजपा के साथ है।
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा। उन्होंने किसानों, खाद संकट, धान खरीदी, कानून-व्यवस्था, महतारी वंदन योजना, राशन वितरण, स्वास्थ्य सेवाओं और आदिवासी हितों से जुड़े मामलों को उठाते हुए कहा कि सरकार किसानों को ठग रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है, धान खरीदी व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है और कानून-व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है।
भूपेश बघेल ने तमनार, हसदेव अरण्य, महादेव ऐप, नकली खाद और पेसा कानून जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता विरोधी फैसले ले रही है और राज्य की सरकार किसी अदृश्य शक्ति के इशारे पर चल रही है।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान हसदेव अरण्य का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पर्यावरण की अनदेखी करते हुए कोयला खनन और बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई को बढ़ावा दिया है।
महंत ने कहा कि 91 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन की अनुमति दिए जाने से करीब 15 हजार पेड़ों की कटाई होगी। उन्होंने हसदेव अरण्य को ‘मध्य भारत के फेफड़े’ बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार उद्योगपतियों के हित में जंगलों और छत्तीसगढ़ की अस्मिता से समझौता कर रही है।
करीब 14 घंटे 30 मिनट तक चली बहस के बाद विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव को ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया और साय सरकार ने सदन में अपना बहुमत बरकरार रखा।



