छत्तीसगढ़ विधानसभा में सवालों की बौछार: ढाई साल में भाजपा के धरमलाल कौशिक, अजय चंद्राकर और भावना बोहरा ने पूछे सबसे ज्यादा 284-284 प्रश्न

By : hashtagu, Last Updated : July 19, 2026 | 6:15 am

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा (Vidhan Sabha) में फरवरी 2024 से जुलाई 2026 तक आयोजित आठ सत्रों के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने सरकार को विभिन्न मुद्दों पर सवालों के घेरे में रखा। इस अवधि में कुल 12,559 प्रश्न (Questions) लगाए गए। इनमें भाजपा (BJP) के विधायक धरमलाल कौशिक, अजय चंद्राकर और भावना बोहरा सबसे आगे रहे। तीनों ने 284-284 प्रश्न (Questions) पूछे। विपक्ष की ओर से कांग्रेस विधायक भोलाराम साहू ने भी 284 प्रश्न पूछकर बराबरी की। इस दौरान विपक्ष ने कुल 7,870 प्रश्न लगाए, जबकि सत्ता पक्ष के विधायकों ने 4,689 प्रश्न पूछे।

भाजपा विधायकों में पुन्नूलाल मोहले ने 283, धर्मजीत सिंह ने 280 और सुशांत शुक्ला ने 271 प्रश्न पूछे। कांग्रेस की ओर से अंबिका मरकाम और दलेश्वर साहू ने 280-280, जबकि बालेश्वर साहू ने 279 प्रश्न लगाए। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने 276 और शेषराज हरवंश ने 272 प्रश्न पूछे। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ढाई साल में हुए आठ विधानसभा सत्रों के दौरान 89 प्रश्न लगाए।

मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने कुल 1,033 प्रश्न पूछे। भाजपा से अजय चंद्राकर और धरमलाल कौशिक, जबकि कांग्रेस से डॉ. चरणदास महंत, कवासी लखमा और उमेश पटेल ने अधिकतम 20-20 प्रश्न लगाए। विधानसभा की नियमावली के अनुसार एक बैठक में किसी सदस्य के अधिकतम चार प्रश्न ही विचार के लिए स्वीकार किए जाते हैं। मानसून सत्र में पांच बैठकें हुईं, इसलिए प्रत्येक विधायक के अधिकतम 20 प्रश्न लिए गए। इस सत्र में 36 विधायकों ने 20-20 प्रश्न पूछे।

मानसून सत्र के दौरान कई अहम मुद्दे सदन में चर्चा का केंद्र बने। पहले दिन अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया और चर्चा की मांग की। सरकार ने इसे छत्तीसगढ़ के अधिकार क्षेत्र से बाहर का विषय बताया। नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र सरकार के सहयोग पर धन्यवाद प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें विपक्ष ने हिस्सा नहीं लिया। भाजपा ने कांग्रेस के इस रुख को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि गरीब परिवारों के मकानों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें उजाड़ दिया गया, जो संविधान और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कार्रवाई को पूरी तरह वैधानिक बताया।

सत्र में औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते हादसे, महतारी वंदन योजना, इंद्रावती टाइगर रिजर्व में तीन बाघों के शिकार और तस्करी, राशन कार्ड, जल जीवन मिशन में अनियमितताओं, आंगनबाड़ी में पोषण आहार की गुणवत्ता और राज्य लोक सेवा आयोग की जांच जैसे मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा हुई।

मानसून सत्र के दौरान सात महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। इनमें छत्तीसगढ़ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन (संशोधन), छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन), छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन), छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर (संशोधन), छत्तीसगढ़ माल एवं सेवा कर (संशोधन), छत्तीसगढ़ अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा (संशोधन) तथा छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026 शामिल हैं।

विधानसभा में शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े 45 से 50, अधोसंरचना से जुड़े 85 से 90, भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं पर 60 से अधिक, कृषि और खाद्यान्न से जुड़े 65 से 70, सामाजिक कल्याण और पेंशन से जुड़े 50 से 55 तथा अपराध, सुरक्षा और अन्य विषयों पर 30 से 35 प्रश्न पूछे गए।

मानसून सत्र के अंतिम दिन कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर देर रात 2:40 बजे तक चर्चा चली। लंबी बहस के बाद सदन ने अविश्वास प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

जिलों के आधार पर देखें तो बिलासपुर, रायपुर, राजनांदगांव और रायगढ़ से सबसे अधिक प्रश्न पूछे गए। इन क्षेत्रों में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, औद्योगिक विस्तार और धान खरीदी केंद्रों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। बस्तर और सरगुजा संभाग के सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा और सरगुजा जिलों से जुड़े सवाल मानव तस्करी, शिक्षकों और डॉक्टरों के रिक्त पदों, बिजली और स्कूल भवन जैसी बुनियादी सुविधाओं पर केंद्रित रहे। वहीं कोरबा और जांजगीर-चांपा में फ्लाई ऐश प्रदूषण और खदानों से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर विपक्ष ने सरकार से कड़े सवाल पूछे। पूरे प्रदेश से जुड़े महतारी वंदन योजना के भुगतान, आंगनबाड़ी पोषण आहार की गुणवत्ता और राज्य लोक सेवा आयोग की जांच जैसे मुद्दे भी पूरे सत्र में प्रमुखता से उठाए गए।